The way to a man's heart is through his stomach.
इस मुहावरे का मतलब बताया गया है कि अगर आप पुरुष का प्रेम पाना चाहती है तो उसे अच्छा खाना परोसे। इसका ज़रा बेहतर मतलब देखा तो वो था - cooking food for a man is a good way to win his affection. पर एक बात तो साफ़ है कि ये मुहावरा पुरुष के दिल का कोई अच्छा खाका नहीं पेश करता। अच्छा खा कर पकाने वाले पर फ़िदा हो जाने से तो ज़ाहिर है कि प्रेम कोई बहुत उत्कृष्ट कोटि का नहीं है। बावर्ची को भी उतनी ही आसानी से हासिल है जितना पत्नी को। हमने तो सुना था कि इंसान जीने के लिए खाता है खाने के लिए नहीं जीता पर ये मुहावरा तो कुछ और ही बयान करता है। सबसे मज़ेदार बात तो ये है कि ये पुरुष जिन्हे भूख से कुछ ज़्यादा खिला कर और समय पर स्वादिष्ट खाना परोस कर ये औरतें खुश हो रही होती है वो कभी यह नहीं सोचते कि ये जो औरत नाम का प्राणी है इसके अंदर भी एक दिल नाम की चीज़ है जिस तक पहुचने के लिए किसी कोशिश की ज़रूरत है। कभी आपने कोई मुहावरा औरतों के दिल तक पहुचने के लिए पुरुषों को नसीहत देते सुना है ?
आज तो हमारा समाज महिलाओं की शिक्षा और कामकाजी होने को लेकर काफी बदल गया है। पर उनके घर के कामकाज को लेकर ज़िम्मेदारी कमोबेश वही है। आज भी वे घर में पका कर पतियों के टिफ़िन पैक करके आएँगी और ऑफिस से जाकर उनके लिए ताज़ा स्वादिष्ट खाना पकायेंगी और अपने को धन्य मानेगी। मुझे फिल्म इंग्लिश विंग्लिश का एक डायलॉग याद आ रहा है ---मौसी तुम लड्डू बनाने के लिए नहीं पैदा नही हुई हो।
इस मुहावरे का मतलब बताया गया है कि अगर आप पुरुष का प्रेम पाना चाहती है तो उसे अच्छा खाना परोसे। इसका ज़रा बेहतर मतलब देखा तो वो था - cooking food for a man is a good way to win his affection. पर एक बात तो साफ़ है कि ये मुहावरा पुरुष के दिल का कोई अच्छा खाका नहीं पेश करता। अच्छा खा कर पकाने वाले पर फ़िदा हो जाने से तो ज़ाहिर है कि प्रेम कोई बहुत उत्कृष्ट कोटि का नहीं है। बावर्ची को भी उतनी ही आसानी से हासिल है जितना पत्नी को। हमने तो सुना था कि इंसान जीने के लिए खाता है खाने के लिए नहीं जीता पर ये मुहावरा तो कुछ और ही बयान करता है। सबसे मज़ेदार बात तो ये है कि ये पुरुष जिन्हे भूख से कुछ ज़्यादा खिला कर और समय पर स्वादिष्ट खाना परोस कर ये औरतें खुश हो रही होती है वो कभी यह नहीं सोचते कि ये जो औरत नाम का प्राणी है इसके अंदर भी एक दिल नाम की चीज़ है जिस तक पहुचने के लिए किसी कोशिश की ज़रूरत है। कभी आपने कोई मुहावरा औरतों के दिल तक पहुचने के लिए पुरुषों को नसीहत देते सुना है ?
आज तो हमारा समाज महिलाओं की शिक्षा और कामकाजी होने को लेकर काफी बदल गया है। पर उनके घर के कामकाज को लेकर ज़िम्मेदारी कमोबेश वही है। आज भी वे घर में पका कर पतियों के टिफ़िन पैक करके आएँगी और ऑफिस से जाकर उनके लिए ताज़ा स्वादिष्ट खाना पकायेंगी और अपने को धन्य मानेगी। मुझे फिल्म इंग्लिश विंग्लिश का एक डायलॉग याद आ रहा है ---मौसी तुम लड्डू बनाने के लिए नहीं पैदा नही हुई हो।

