कोई बात नहीं। ये बड़ा अच्छा सा वाक्य है। बड़े से बड़े झंझट को सहज ही निपटा देना। कोई बात नहीं Let us move ahead. पर यही वाक्य बहुत बार हमारी मुसीबतों को बनाये रखता है। क्योंकि हम गलत बातों को बर्दाश्त कर रहे होते। घर में बेटी किचेन में मदद करेगी। भाई और पिता के खाने की और दूसरे कामों की चिंता करेगी। पति और पत्नी दोनों बाहर से आये है तो आते ही पति फ्रेश हो कर बैठेगा और टीवी देखेगा और पत्नी सीधे किचेन में जाकर चाय बनाएगी। अगर समाज की सोच के मुताबिक औरत कमज़ोर है तो आराम की तो उसे ज़रूरत है ना। अभी एक दिन मैं अपनी मित्र से इसी पर चर्चा कर रही थी कि अब ये सब काम नहीं होते। इस पर उसने उदार भाव से कहा कोई बात नहीं। इतने सालों से तो कर ही रहे है ना। मेरा कहना है सालों से किसी काम को हम कर रहे है इसीलिए हम उसे सही नहीं मान ले। सुबह होते ही नाश्ता बनाओ वह भी सबकी पसंद के अनुसार। फिर दोपहर के खाने की चिंता करो। उससे निपटो नहीं कि शाम की चाय का समय हो गया। चाय के साथ कुछ मिल जाये तो बहुत ही अच्छा। फिर रात के खाने में लग जाओ। इस सारी प्रक्रिया में आप सबकी पसंद और स्वास्थ्य का भी ख्याल रखे पर आपसे कोई ये भी नहीं पूछेगा की आपने खाया या नहीं। और ये तो सिर्फ किचेन का काम है। उसके अलावा आप बाहर से सामान लाएं उसे ठीक से अरेंज करे। कब क्या घटा इसका ट्रैक रखे। सबके कपडे धोएं सुखाये अरेंज करे। घर के सामानो की चिंता करे। टीवी फ्रिज मिक्सर पंखे बिजली सब ठीक रहे। ना ठीक हो तो करवाएं। बिल भरें और ना जाने क्या क्या इस फेहरिस्त मे जुड़ सकता है। और ये सब करने के साथ साथ आप नौकरी भी करें। बहुत बार इस तरह के सर्वे पढ़ने को मिल जाते है कि औरतों के कामों को जो कि वोह चौबीस घंटे करती है अगर पैसों के भुगतान में देखा जाये तो कितना होगा। पर यहाँ तो आपको एक ऐसा इंसान मिला हुआ है जो इन सब कामों के लिए आपसे पैसे लेने के बजाये बाहर नौकरी करके आपके लिए पैसे ला रहा है। आप चिंता न करें क्योंकि उसके बाद भी वह ये कहने को तैयार है कि
कोई बात नहीं.
कोई बात नहीं.

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